शारीरिक शिक्षा

सिद्धार्थनगर:जनपदकेबांसीतहसीलमेंशेरशाहसूरीसेलेकरमौर्यकालतककीप्राचीनधरोहरेंहैं,जोअनदेखीकेकारणविलुप्तहोनेकोहै।बांसी-मेहदावलमार्गपरनगरकेबहबोलस्थितशेरशाहसूरीकाबनायागयापुलजर्जरहोरहाहै।इसीमार्गपरनगरसेमात्रचारकिमीदूरमहदेवागांवकेपाससम्राटअशोककेसमयकापोखराऔरमौर्यकालीनशिवमंदिरभीहै।पुरातत्वविभागयहांखोदाईसेमिलेअवशेषोंकोसंरक्षितकररखाहै।बावजूदइनपुरावशेषोंऔरधरोहरोंपरध्याननहींदेरहाहै।

वर्ष1540से1545तकशेरशाहसूरीकादेशभरमेंराजरहा।अपनेपांचवर्षकेकार्यकालमेंउसनेउनसभीपहलुओंपरध्यानदिया,जिससेकिसान,गरीबवआमजनकोसुविधामिलसके।सन1540सेपूर्वतकबिहारप्रदेशमेंइनकेपूर्वजोंकाराजहुआकरताथा।शेरशाहसूरीकाराजजबपूरेदेशमेंफैलातोवहविहारसेगोरखपुरहोतेहुएबांसीकेइसप्राचीनकस्बेमेंपहुंचा।उससमयराप्तीनदीकाप्रवाहनगरकेदक्षिणीपूर्वीछोरसेहोताथा।नदीकोपारकरनेकेलिएउसनेइसपुलकानिर्माणकरायाथा।लाखौरीईंटोंसेनिर्मितदोपायोंकेइसपुलकीलंबाई20मीटरऔरचौड़ाईतीनमीटरहै।इतिहासकारोंकाकहनाहैशेरशाहनेदेशभरमेंकुल14पुलबनवाएथे,यहपुलउनमेंसेएकहै।इसीप्रकारइसीनगरसेचारकिमीदूरमहदेवागांवकेसन्निकटस्थितशिवमंदिरवपोखरामौर्यकालकीयाददिलाताहै।बौद्धदीक्षाकेउपरांतसम्राटअशोकभगवानबुद्धकीजन्मस्थलीकपिलवस्तुआतेसमयअपनेलावलश्करकेसाथकुछदिनयहांपरठहरेथे।उसीदौरानइनविशालतालाबकानिर्माणकरायाजिसेशिवसागरकेनामसेआजजानतेहैं।महदेवागांवकेपूरबस्थितयहतालाबवर्तमानसमयमेंबांसी-मेहदावलमार्गकेबनजानेसेदोभागोंमेंविभाजितहै।इसकेपश्चिमबभनीवदक्षिणमेंचनरगड्डीगांवस्थितहैजोसंस्कृतकेचन्द्रगढ़ीकाअपभ्रंशहै।सम्राटअशोकनेअपनेपूर्वजचंद्रगुप्तमौर्यकेनामसेचंद्रगढ़ीकेनामसेइसेबसायाथा।यहांस्थापितशिवलिगकोइतिहासकारऐतिहासिकतथामौर्यकालसेभीपहलेकाबतातेहैं।

मिलचुकेहैंकईप्रमाण:

शिवसागरनामकइसतालाबकेचारोंतरफकीखुदाई1955-56मेंपुरातत्वविभागकीटीमनेकियातोअशोकस्तंभकाशीर्षभाग,मौर्यकालीनसिक्केवकईमोटीदीवालवमूर्तियांउन्हेंमिलींथीं।इसकाउल्लेखइंडियाआर्कियोलॉजीएरिव्यू1955-56अंककेपृष्ठसंख्या61मेंहै।खुदाईमेंमिलेअशोकस्तंभकेशिखरपरस्थितसिंहकीआकृतिकानिचलाभागलखनऊस्थितराजकीयसंग्रहालयमेंमहदेवा-बस्तीकीपट्टीलगाकर55.254नंबरमेंरखाहै।यहांसेमिलेकुछअवशेषोंकोकोलकातासंग्रहालयमेंभीरखागयाहै।

रतनसेनडिग्रीकालेजकेप्राचार्यवइतिहासविद्डा.मिथलेशत्रिपाठीकाकहनाहैकिबांसीनगरकेपासस्थितपुलकीबनावटइसबातकोसिद्धकरचुकाहैकिइसकानिर्माणशेरशाहसूरीकेकार्यकालमेंहीहुआ।इसीप्रकारमहदेवागांवकेपासकास्थानवैदिकसभ्यताकाप्रमुखकेंद्ररहा,जहांपशुपतिसंप्रदायकेलोगरहाकरतेथे।महदेवागांवप्राचीनकालसेहीसनातनधर्मियोंकीआस्थाकाकेंद्ररहा।सागरवउसकेआसपासकीखुदाईसेमिलेअवशेषमौर्यकालीनहीहैं।

ज्वाइंटमजिस्ट्रेटबांसीजगप्रवेशनेबतायाकिनगरमेंस्थितइनऐतिहासिकविरासतोंकीमैंजानकारीहासिलकरपुरातत्वविभागवशासनकोपत्रलिखअवगतकराऊंगा।आग्रहभीकरूंगाकिइन्हेंसंरक्षितकरनेवइसेऔरविस्तारदेनेकादिशानिर्देशदें।