शारीरिक शिक्षा

छत्तीसगढ़मेंबीजापुरकेजंगलोंमेंप्राचीनमूर्तियांमिलीहैं।इनप्रतिमाओंकोपाषाणकालीनऔरविभिन्नदेवी-देवताओंकीबतायाजारहाहै।स्थानीयआदिवासियोंनेइनप्रतिमाओंकेलिएमंदिरबनवानेकीमांगकीहै।उन्होंनेइनप्रतिमाओंकेहजारोंसालपुरानाहोनेकादावाकियाहै।वहींस्थानीयविधायकनेमंदिरबनवानेकाआश्वासनभीदेदियाहै।हालांकिभारतीयपुरातत्वविभाग(ASI)कोइससंबंधमेंकोईजानकारीनहींहै।

यहप्रतिमाएंदक्षिण-पश्चिमबस्तरकेबीजापुरमेंउस्कालेडजंगलोंसेप्राप्तहुईहैं।कुछजमीनकेऊपरथीऔरकुछअंदरधंसीहुईमिलीहैं।यहक्षेत्रमहाराष्ट्रऔरअविभाजितआंध्रप्रदेश(अबतेलंगानाराज्य)सेलगाहुआहै।बतायाजारहाहैकिबीजापुरजिलारायलसीमाक्षेत्रमेंआताथा।पहलेभीमहाराष्ट्रऔरवर्तमानसीमांध्रराज्यकेकुछहिस्सोंमेंपाषाणयुगकेचिन्हमिलेहैं।आंध्रक्षेत्रकेइतिहासऔरसंस्कृतिमेंपाषाणयुगकहमूर्तियांअभीभीमौजूदहैं।

ग्रामीणबोले-येमूर्तियांउनकेदादा-परदादाओंकेसमयकी

स्थानीयग्रामीणोंकेअनुसार,जंगलमेंमिलीमूर्तियांउनकेदादा-परदादाओंकेसमयकीहैं।क्षेत्रीयविधायकविक्रमशाहमंडावीकेक्षेत्रीयभ्रमणऔरजनसंपर्ककेदौरानग्रामीणोंनेइससंबंधमेंउन्हेंअवगतकरातेहुएमंदिरनिर्माणकरानेकीबातकहीथी।ग्रामीणोंकाकहनाहैकिविधायकनेधार्मिकभावनाकासम्मानकरतेहुएमंदिरनिर्माणकेलिएहरसंभवमददकीबातकहीहै।वहींदूसरीओरASIकोइससंबंधमेंअबतकपतानहींहै।

By Connor