शारीरिक शिक्षा

यतीन्द्रमिश्र। हिंदूकेविख्यातकविरामधारीसिंह‘दिनकर’की‘संस्कृतिकेचारअध्याय’विचारऔरलेखनकीदुनियामेंएकअसाधारणघटनामानीजातीहै।वर्ष1956मेंपहलीबारप्रकाशित,आजजबइसकृतिकोसमाजमेंआएहुए66वर्षकाएकबड़ासमयबीतचुकाहै,इसकीप्रासंगिकतानितनवीनहोतीजातीहै।स्वाधीनताकेहीरकजयंतीवर्षमेंहमऐसीकृतियोंकोरेखांकितकरनेकाविनम्रप्रयासकररहेहैं,जिन्होंनेभारतीयताकोपारिभाषितकरनेऔरउसकेमाध्यमसेएकबौद्धिकविमर्शरचनेकामौलिककामकियाहै,दिनकरजीकीयहकिताबनिश्चितहीएकमूल्यवानधरोहरकीतरहदेखीजानीचाहिए।

इसकिताबकोयहगौरवहासिलहैकिइसकेपहलेसंस्करणकीभूमिकाभारतकेप्रधानमंत्रीजवाहरलालनेहरूनेलिखीथी।दिनकरअपनेलेखकीयनिवेदनमेंभारतकीविविधवर्णीसंस्कृतिकीएकताकीबातकरतेहैं,‘पुस्तकलिखते-लिखते,इसविषयमेंमेरीआस्थाऔरभीबढ़गईकिभारतकीसंस्कृति,आरंभसेही,सामासिकरहीहै।उत्तर-दक्षिण,पूर्व-पश्चिम,देशमेंजहांभीजोहिंदूबसतेहैं,उनकीसंस्कृतिएकहै,एवंभारतकीप्रत्येकक्षेत्रीयविशेषताहमारीइसीसामासिकसंस्कृतिकीविशेषताहै।तबहिंदूऔरमुसलमानहैं,जोदेखनेमेंअबभीदोलगतेहैं,किंतुउनकेबीचभीसांस्कृतिकएकताविद्यमानहै,जोउनकीभिन्नताकोकमकरतीहै।’सांस्कृतिकभिन्नताकायहीप्रश्नलिएहुएरचनाकारनेभारतकोएकराष्ट्रऔरसांस्कृतिकइकाईकेरूपमेंदेखतेहुएभारतीयसंस्कृतिकोपरखनेकाप्रयत्नकियाहै।

यहपुस्तकइसअर्थमेंभीमहत्वपूर्णहैकिआधीसदीसेअधिकसमयबीतजानेकेबादभीइससेसंबंधितसहमतियों-असहमतियों,पक्षऔरविपक्षकेढेरोंतर्कआजतकविमर्शमूलकबनेहुएहैं।बावजूदइसकेकिएकरोचकतथ्यरचनाकारस्थापितकरताहैकिवहइसेइतिहासनहीं,बल्किसाहित्यकाग्रंथमानताहै।लगभग800पृष्ठोंकेइसग्रंथकोचारबड़ीसांस्कृतिकक्रांतियोंकेसंदर्भमेंदेखागयाहै।दिनकरजीमानतेहैंकियेचारऐसेनिर्णायकसोपानहैं,जिनकेमाध्यमसेहमारीसंस्कृतिकाइतिहासअपनाअस्तित्वपाताहै।पहलीक्रांतिकोवेआर्योंकेभारतवर्षमेंआनेऔरउनकेआर्येतरजातियोंसेसंपर्कऔरनएसमाजनिर्माणकेरूपमेंदेखतेहैं।उनकामाननाहैकिइसबुनियादीभारतीयसंस्कृतिकेलगभगआधेउपकरणआर्योंकेदिएहुएहैंऔरउसकादूसराआधाआर्येतरजातियोंकाअंशदानहै।

दूसरीक्रांतिकाविचाररचनाकारनेतबमानाहै,जबमहावीरऔरगौतमबुद्धनेस्थापितसनातनधर्मकेविरुद्धविद्रोहकियातथाउपनिषदोंकीचिंतनधाराकोखींचकरवेअपनेमनोवांछितदिशाकीओरलेगए।महावीरऔरगौतमबुद्धकेप्रभावोंसेभारतकेसांस्कृतिकदृश्यपटलकोवेएकबड़ीनिर्मितिकेरूपमेंदेखतेहैं,जिसकाप्रभावआजतककायमहै।तीसरीक्रांतिकाकारणवेतबमानतेहैं,जबइस्लाम,विजेताओंकेधर्मकेरूपमें,भारतपहुंचाऔरइसदेशमेंहिंदुत्वकेसाथउसकासंपर्कहुआ।चौथीक्रांति,उसदौरकोरेखांकितकरतेहुएअस्तित्वपातीहै,जबभारतमेंयूरोपकाआगमनहुआ।इन्हींचारक्रांतियोंकेविश्लेषण,प्रभावोंऔरइतिहासकेअध्ययनकासारहैयहपुस्तक।

चारअध्यायोंमेंविभक्तयहकृतिभारतकीऐतिहासिकबहुलताकापाठप्रभावीढंगसेरखतीहै।पहलेहीअध्यायमें‘भारतीयजनताकीरचनाऔरहिंदूसंस्कृतिकाआविर्भाव’केतहतकईप्रकरणोंमेंबंटाविमर्शआर्य-द्रविड़संबंध,वर्णव्यवस्थाऔरजाति-भेद,वैष्णवधर्म,रामकथाकीव्यापकता,कृष्णनामकीप्राचीनताकेसाथहीऋग्वेदकेरचनाकालतकपसरीहुईहै।इसीतरह,दूसरेअध्यायमेंहिंदुत्वसेविद्रोहकेतहतजैनऔरबौद्धमतोंकेसिद्धांतऔरउनकावैदिकधर्मपरप्रभावआदिकोतटस्थताकेसाथपरखनेकीकोशिशकीगईहै।इससंदर्भमेंसांस्कृतिकउपनिवेशोंकीस्थापना,श्रीमद्भगवद्गीताआदिकीचर्चाकेसाथशाक्तधर्म,तंत्रसाधना,योग,पुराण,शून्यवादऔरकैवल्ययामोक्षतककोविश्लेषितकियागयाहै।यहकहाजासकताहै,अपनेविशदअध्ययनकेतहततथाअनेकविद्वानोंकीपुस्तकों,ग्रंथोंसेसंदर्भचुनतेहुएदिनकरजीभारतीयदृष्टिकाऐसाविस्तृतफलकरचतेहैं,जिसकेअवगाहनकेलिएवैचारिकदृष्टिसेउदारहोनाएकजरूरीशर्तकीतरहयहांलागूहै।

तीसराअध्याय,‘हिंदूसंस्कृतिऔरइस्लाम’केतहतमुस्लिमआक्रमणऔरहिंदूसमाजकीव्याख्याकेसाथहीहिंदू-मुस्लिमसंबंधकीअनूठीव्यंजनाकोचरितार्थकरताहै।यहअध्यायभक्तिआंदोलन,सिखधर्मकेविश्लेषणकेसाथहीकलाऔरशिल्पपरइस्लामकेप्रभावकोरचनात्मकढंगसेरेखांकितकरताहै।अंतिमअध्यायअंग्रेजोंकेआगमन,मिशनरियोंकाहमारेदेशपरप्रभाव,कंपनीसरकारकीशिक्षानीतिकेअलावाब्रह्मसमाजऔरभारतीयनवजागरणकालकोशानदारढंगसेव्याख्यायितकरनेमेंएकाग्रहै।कुलमिलाकरयहएकबौद्धिककिताबहै,जोहरतरहआधुनिकसंदर्भोंमेंभीअपनेपढ़ेजानेकीपैरवीकरतीहै।

पुस्तक:संस्कृतिकेचारअध्याय

लेखक:रामधारीसिंह‘दिनकर’

प्रकाशक:लोकभारतीप्रकाशन,इलाहाबाद(अबप्रयागराज)

By Cooper