शारीरिक शिक्षा

यतीन्द्रमिश्र। भारतीयप्राच्यविद्याऔरपरंपराकेलेखन,विश्लेषणऔरअभिलेखीकरणमेंजिनप्रमुखविद्वानोंकीगणनाहोतीहै,उनमेंगोविंदचंद्रपांडेकाबड़ामुकामहै।वेउसपरंपराकेवाहकहैं,जहांवैदिकदेवाख्यानोंकोतुलनात्मकमिथकीयविज्ञानकीतरहहीनहीं,बल्कितत्वजिज्ञासाकीदृष्टिसेभीपरखागयाहै।ऐसेमेंउनकीउपस्थितिपंडितक्षेत्रेशचंद्रचट्टोपाध्याय,पीवीकाणो,वासुदेवशरणअग्रवाल,भगवतशरणउपाध्याय,पंडितगोपीनाथकविराज,विद्यानिवासमिश्र,कलानाथशास्त्री,यशदेवशल्यजैसेदार्शनिकों,मीमांसकोंकेबीचबनतीहै।

स्वाधीनताकी75वींवर्षगांठकेअवसरपरगोविंदचंद्रपांडेकी‘वैदिकसंस्कृति’कापाठप्रासंगिकबनजाताहै,जिसनेअपनेप्रकाशनकेबादभारतीयआध्यात्मिकऔरसनातनचेतनाकेअभिप्रायोंकोसार्थकताकेसाथपुनर्विश्लेषितकियाहै।हमेंमालूमहैकिभारतीयपरंपरामेंवेदअनादिमानेजातेहैंतथामहर्षियास्कसेलेकरसायणतकअनेकपंडितोंनेबहुतेरेअर्थव्युत्पन्नकिएहैं।शास्त्रर्थकीसशक्तपरंपराहोनेकेकारणभीवेदोंकीइतनीबहुस्तरीयऔरजटिलव्याख्याएंपूर्वमेंसंभवहुईहैंकिउनकाकईबारसहीऔरसमग्रचिंतनदेखपानादुष्करकामहोताहै।इसअर्थमेंपुरानीभाषाशास्त्रीयव्याख्याओंकोसमकालीनसंदर्भोंमेंपरखनेकीयुक्तिपांडेजीकीयहकिताबप्रतिपादितकरतीहै।देखनेवालीबातयहहैकिऐतिहासिकपरिप्रेक्ष्योंऔरआस्वादपरकमीमांसाकेतहतइसग्रंथमेंमैक्समूलरकीनईव्याख्याकेसाथहीसायणआदिकीयज्ञपरकव्याख्यापरभीविचारकियागयाहै।ऐसेमेंदयानंदसरस्वती,श्रीअरविंद,मधूसूदनओझाआदिकीसंकेतपरकव्याख्याओंपरभीसम्यकदृष्टिडालीगईहै।

ग्रंथकीसबसेमहत्वपूर्णयोजनायहनजरआतीहैकिवैदिकसंस्कृतिकीपरिभाषाकरनेवालेऋत-सत्यात्मकसूत्रोंकीविवेचनाऔरकिसप्रकारवेभारतीयसभ्यताकेइतिहासमेंप्रकटहुए,इसपरभीसमग्रतासेचिंतनहुआहै।साथही,धर्म,दर्शनऔरविज्ञानकीआधुनिकसामग्रीकेविवेचनमेंइसतरहलेखकनेगहराआंतरिकअनुशासनपैदाकियाहैकिपूरीकिताबपढ़तेहुएयहबातविस्मयमेंडालतीहैकिपारंपरिकऔरआधुनिकदोनोंहीपरंपराओंकीसमीक्षासमावेशीढंगसेयहांविस्तारपातीहै।

चारबड़ेखंडोंमेंविभक्तयहग्रंथअपनेविषयकेअनुकूलहीवैदिकविमर्शकाविस्तारकरताहै।पहलेखंडमेंवेद,उनकेरचयिताऔररचनाकाल,आर्योकीखोज,पूर्ववैदिकसमाजऔरउसयुगकीआध्यात्मिकतापरकेंद्रितहै।दूसराखंडआर्षकाव्यकीधारापरएकाग्रहै।तीसरेभागमेंउत्तरवैदिककाल,संहिताएंऔरब्राह्मणसाहित्यकेसाथकर्मकांडऔरउसकेअर्थपरप्रकाशडालागयाहै।चौथेखंडमेंउपनिषदोंकापरिशीलनऔरवैदिकविज्ञानपरभीविचारकियागयाहै।पुस्तककीसमग्रताकोदेखतेहुएपरिशिष्टमेंलगभग50पृष्ठोंकाबहुमूल्यवहखंडसमाहितहै,जिसमेंऋग्वेदसंहिताकेअनूदितसूक्तोंकेमूलपाठ,जोमैक्समूलरद्वारासंपादितहैं,दिएगएहैं।एकबारगीयहअध्ययनबोङिाललगताहै,मगरधैर्यसेइसेपढ़नेऔरगो¨वदचंद्रपांडेकेअद्भुतभाष्यकोदेखतेहुएपाठमेंसहजबहावभीआनेलगताहै,जोवैदिककालकेतमामनियमऔरस्थापनाओं,प्रसंगोंऔरउनकेव्यावहारिकइस्तेमालकेबारेमेंनईजानकारियांदेताहै।

दूसरेखंडमेंऋग्वेदकेसूक्तोंऔरनिरुक्तोंकाकाव्यात्मकअर्थचकितकरताहै।कुछअर्थतोइतनेसंगीतात्मकहैंकिआपकोइन्हेंपढ़तेहुएकहींगहरेमनमेंएकविशेषतालपरसस्वरपढ़नेकाउत्साहजगताहै।वेदोंकीकठिनशब्दावलियोंकेसरलीकृतअभिप्रायकोसमझनेकेलिएभीयहएकआदर्शकृतिहै।उदाहरणकेतौरपर,‘स्तोम’काअर्थसामगानकेअंतर्गतप्रगीतस्तुतिहै,‘उक्थ’-ऋकपाठियोंकाशस्त्रहै,‘गिर’-उपासककीपुकारहै,जिसमेंस्तुति,प्रार्थनाआदिसभीसम्मिलितहैं।इसतरहसैकड़ोंशब्दोंकेसमाजशास्त्रीयअर्थऔरउनकीदार्शनिकपरंपराकेसाथसंबंधोंकीसमीक्षाहीइसकृतिकोमहत्वपूर्णबनातेहैं।कर्मकांडवालेखंडमेंसंक्षिप्तढंगसेवैदिककालीनकर्मकांडकाएकपूराअध्यायहीरचागयाहै,जोपीवीकाणोके‘धर्मशास्त्रकाइतिहास’कीपूरकव्याख्याजैसालगताहै।उपनिषदोंकापरिशीलनमेंईशोपनिषद,केनोपनिषद,कठोपनिषद,प्रश्नोपनिषद,मुंडकोपनिषद,मांडूक्योपनिषद,ऐतरेयउपनिषद,छान्दोग्यउपनिषद,बृहदारण्यकउपनिषदआदिपरसारगर्भितनोट्सतथाव्याख्याइसेकालजयीबनातेहैं।

युवाओंकेलिएयहकिताबएकआदर्शहोसकतीहै,जिन्हेंउपनिषदोंकेभारी-भरकमज्ञानकोयदिसमग्रताऔरसंक्षिप्तिमेंसमझनाहै,तोयहग्रंथएककुंजीकीतरहकामकरेगा।कहनाचाहिएकितत्वजिज्ञासाऔरऐतिहासिकताकेसमन्वयकेद्वाराभारतीयधर्मऔरदर्शन,परंपराऔरवांगमय,विचारऔरजीवनशैलीकाएकसर्वागीणअध्ययनहैयहपुस्तक,जिसकीमूलचिंतावेदोंकेसरसअनुशीलनकीहै।इससंदर्भमेंभारतीयताकोपरिभाषितकरनेमेंयहकिताबएकमानकउदाहरणहै,जिसेअन्यभाषाओंमेंभीअनूदितहोकरप्रकाशितहोनाचाहिए।दस्तावेजी,प्रामाणिक,गंभीरऔरदार्शनिकदृष्टिसेअनुपमग्रंथ।

By Cooper