शारीरिक शिक्षा

जिलामुख्यालयसेसटेमंगरौनीगांवमिथिलामेंशक्तिउपासनाकेकेंद्रकेरूपमेंप्राचीनकालसेविख्यातरहाहै।यहांकीविद्वतपरंपराकीअविछन्नधारासहस्त्राब्दिसेहीविशिष्टरहीहै।बूढ़ीमाईमंदिरशक्तिपीठकेरूपमेंसदियोंसेप्रसिद्धहै।यहांपूजाकरनेवालोंकीमनोकामनाभगवतीपूरीकरतीहैं।इतिहास

कहाजाताहैकियहांकीभगवतीकारूपहैकामाख्याकाप्रतीकहै।मानाजाताहैकिमिथिलाकेहृदयस्थलमधुबनीकेबेनीपट्टीस्थितउच्चैठ,राजराजेश्वरशक्तिपीठडोकहरवबूढ़ीमाईत्रिकोणबनाताहै,जोतांत्रिकसंकेतकहै।मंदिरमेंसामान्यपूजाकेसाथविशिष्टतांत्रिकपंडितोंद्वाराभगवतीकीतांत्रिकविधिसेपूजाकीजातीहै।यहस्थललगभगएकहजारसालपुरानाहै।मंदिरमेंशक्तिसेसंबंधितयंत्रस्थापितहै।वैसेतोयहांसालोंभरश्रद्धालुओंकाआनारहताहै।

'बूढ़ीमाईमंदिरकाफीप्राचीनहै।यहांजोविग्रहहैवहकामाख्याकाप्रतिरूपहै।शारदीयनवरात्रमेंविशेषपूजनकाविधानहै।संध्याआरतीमेंबड़ीसंख्यामेंश्रद्धालुशामिलहोतेहै।यहांजोसच्चेमनसेमनोकामनालेकरआतेहैंउसेमैयापूरीकरतेहैं।'

-सुभाषचंद्रझा,पुजारी

मंदिरमेंसामान्यपूजाकेसाथविशिष्टतांत्रिकपंडितोंद्वाराभगवतीकीतांत्रिकविधिसेपूजाकीजातीहै।बूढ़ीमाईमंदिरलगभगएकहजारसालपुरानाहै।शारदीयनवरात्रमेंशारदीयनवरात्रमेंदेशकेअलावानेपालकेहजारोंश्रद्धालुयहांमाताकेदर्शनकोआतेहैं।

-पं.ऋषिनाथझा,ज्योतिषाचार्य

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