शारीरिक शिक्षा

खेती किसानी से जुड़ा युवा खेती छोड़कर दूसरेउद्योग धंधो की तरफ बढ़ रहा है.लेकिन ऐसे दौर में देश की बेटियों ने उसी घाटे को फायदे की खेती बना दिया है.झज्जर जिले के टांडा हेड़ी गांव में खेती करने वाली शिवानी महेष्वरीऔरवामीकानेफूलों कीखेतीकरयेसाबितकरदियाहै.

एमबीए कर रहीशिवानीऔरसीए कर चुकी वामीका ने आधुनिक खेती कोफायदे की खेती बना दिया है.फूलोंऔरसब्जीकीखेतीसेयेअच्छीखासीकमाईभीकररहीहैं.

15 एकड़ में नेट फार्म हाउस लगाकर फूलों और सब्जियों की खेती की जा रही है.शिवानी को हाल ही में फूल रत्न अवार्डऔरवामिकाको51हजाररुपयेकेपुरस्कारसेहरियाणाकोनवाजागयाहै.शिवानीकाकहनाहैकिअबबेटियांभीखेतीकरसकतीहैं.

इन दोनों बेटियों को सीलकराम धनखड़ ने ये खेती करना सिखाया और अलग-अलग तरह की जानकारियां दी.क्योंकि सिलकाराम काफी समय से नेटफार्मींग के तहत सब्जी की खेती करते हैं. उन्होंने बताया कि शिवानीऔरवामीका का जज्बा देखकर उन्हे लगता है कि वो आने वाले दिनों में आधुनिक खेती में बेटियों के लिये ब्रांड बनकरउभरेंगी.

फूलों की खेती के लिये शिवानी महेश्वरी को सूरजकुंड़ के किसान मेले में फूल रत्नअवार्ड से नवाजा गया है.जबकी वामीका को 51 हजार रूपए का पुरूस्कार दियागया. ये दोनों  अपने नेट फार्म में जरवेरा, ग्लैडियस,लीलीयम, रजनीगंधा और गुलाब की खेती कर रही हैं. एक एकड़ में हर साल फूलों की खेती से 8 लाख रूपये तक का मुनाफा भीकमा रही है.

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