शारीरिक शिक्षा

सम्भल:गुन्नौरतहसीलकायेबांधआसपासकेक्षेत्रकेलिएबाबाकाआशीर्वादसाबितहुआ।श्रीहरिबाबाधामगवांपरगुरुपूर्णिमापर्वपरलाखोंकीसंख्यामेंलोगदर्शनकरनेपहुंचतेहैं।मंदिरव्यवस्थापकनेबतायाकिऐसाअनुमानहैकिकईलाखकीसंख्यामेंलोगआएंगे।लोगोंकीबाबामेंगहरीआस्थाहै।गुन्नौरतहसीलक्षेत्रमेंस्थितहरिबाबाधामपरभंडारेवरासलीला,भजनकीर्तनचलरहाहै।धामपरलोगोंकीदर्शनकोभीड़लगरहीहै।

परिक्रमाकरकेलोगपुण्यलाभकमारहेहैं।विदितहोकिश्रीहरिबाबाधामगंवालोगोंकीआस्थाकाकेंद्रहै।यहांदिल्ली,पंजाब,हरियाणा,राजस्थानआदिकेअलावाउत्तरप्रदेशकेशहरोंसेलोगआतेहैं।लोगोंमेंहरिबाबाकेप्रतिगहरीश्रद्धाहै।आश्रमकेसंचालकबतातेहैंकिश्रीहरिबाबाकाजन्मफाल्गुनशुक्लचतुर्दशीकोपंजाबकेजिलेहोशियारपुरकेगंधवालमेंहुआथा।वहएमबीबीएसकीअंतिमवर्षकीपढाईकररहेथेतभीवहगंगाकिनारेमोलनपुरकेपासघूमतेहुएआकररुके।क्षेत्रउससमयबाढ़सेजूझरहाथा।उन्होंनेक्षेत्रदु:खदर्दकोसमझा।उन्होंनेलोगोंकेसहयोगसे34किमीबांधबहुतकमसमयमेंबनादिया।क्षेत्रकोबाढ़केदंशसेबचाया।तभीसेलोगोमेंउनकीआस्थाबढतीगयी।आजभीलोगयहांआकरबांधपरमिट्टीडालकरअपनीआस्थाजतातेहैं।क्षेत्रकेलोगोमेंउन्होंनेभक्तिकीभावनासेजोड़ा।यहां24घंटेभजनकीर्तनचलतारहताहै।धामपरभंडारोंकाआयोजनचलरहाहै।दर्शनकेलिएलोगोंकीभीड़लगरहीहै।भागवतकथारासलीलाकाआयोजनभीचलरहाहै।श्रीहरिबाबानेअपनेचरणस्पर्शनहींकरवातेथे।गुन्नौरहीनहींबल्किआसपासकेऔरदूसरेराज्योंकेलोगोंद्वारापैरछूनेकाप्रयासकियालेकिनउन्होंनेमनाहीकिया।