शारीरिक शिक्षा

वाराणसी,जेएनएन।शिक्षाकेअसलीअर्थसेहमारापरिचयकरानेवालेदर्शनऔरआध्यामिकशिक्षाकेशिखरपुरुषजिद्दूकृष्णमूर्तिने1956मेंबनारसकेराजघाटवसंताकालेजस्थापितकिया।आजयहकाशीकेसबसेशांतऔरसुकूनवालेक्षेत्रोंमेंसबसेऊपरविद्यमानहै।जिद्दूकृष्णमूर्तिकानिधन17फरवरी,1986कोकैलिफोर्नियामेंहुआथाऔरउनकाजन्‍म  11मई,1895 कोआंध्रप्रदेशमेंहुआथा।हालां‍कि,इनदोनोंस्‍थानोंकेबीचवाराणसीसे उनकाजुड़ावऐसाहुआकिवहविश्‍वशिक्षकबनगए।

असलमेंकृष्णमृर्तिजिसउदेश्यकीप्राप्तिकेलिएबनारसआएथेउसकेलिएइसीप्रकारकीशांतिकीआवश्यकताथी।देश-दुनियासेखिन्न-भिन्नविचारोंऔरटूटेहुएमनकेलोगजबकृष्णमूर्तिकेपासआतेथेतोवहजरूरहीउनसेएकव्यावहारिकसमाधानलेकरवापसजातेथे।येसमाधानदीर्घकालिकलाभकेहोतेथे,किसीजंतर-मंतरकीतरहसेक्षणिकनहींथा।धर्मऔरआध्यात्मकानगरबनारसदेश-दुनियाकेलोगोंकेलिएशांतिप्रदानकरनेकाभीस्थलथा।वसंतकालेजमेंहिंदीविभागकीअध्यक्षडा.शशिकलात्रिपाठीकेअनुसारबाल्यकालमेंजिददूकादिमागपढ़ाईसेकोसोंदूरथा।वहअपनीकक्षातकमेंउतीर्णनहींहोसके।इसकारणसेवहस्कूलीशिक्षासेबेदखलकरदिएगए।इसकेबादएनीबेसेंटकीनजरएकबारजिद्दूकृष्णमूॢतकोदत्तकपुत्रबनाकरआंध्रप्रदेशबनारसलेआयीं।

यहबनारसकाहीप्रभावथाकिस्कूलमेंअनुत्तीर्णवऔपचारिकशिक्षानलेनेवालेकृष्णमूर्तिविश्वशिक्षककेरूपमेंस्थापितहुए।उनकीदर्शनकेप्रतिबढ़तीख्यातिकोदेखतेहुएएनीबेसेंटकीथियोसाफिकलसोसायटीनेहीविश्वशिक्षककीउपाधिप्रदानकियाथा।डा.त्रिपाठीबतातीहैंकिवसंताकालेजमेंआजकापुस्तकालयहीकृष्णमूर्तिसेंटरकामुख्यदफ्तरथा।अबइसेहीसाइलेंसरूमभीकहतेहैं।