शारीरिक शिक्षा

सिद्धार्थनगर:बुंदेलखंडविश्वविद्यालयकीविभागाध्यक्षगृहविज्ञानसंकायडा.प्रतिभाआर्यानेकहाकिदेशमेंखानपानकीव्यवस्थासु²ढ़रहीहै।लेकिनइधरकुछदिनोंमेंदिखरहाहैकिपरंपरागतखाद्यकोछोड़पश्चिमीसभ्यताकीओरभागरहेहैं।इससेशरीरमेंआवश्यकतत्वोंकीकमीहोरहीहै।जिससेमहिला,बालिकाऔरबच्चेशारीरिकरूपसेकमजोरहोरहेहैं।

उन्होंनेसिद्धार्थविश्वविद्यालयमेंमिशनशक्तिप्रकोष्ठकीओरसेहोरहेकार्यक्रममेंदूसरेदिनमंगलवारकोआनलाइनव्याख्यानदिया।भोजनएवंप्रतिरोधकक्षमताबढ़ानेवालेभोज्यपदार्थविषयकगोष्ठीमेंकहाकिदेशमेंकुपोषणहोनेकेदोप्रमुखकारणहैं।इसेदूरकियाजासकताहै।खानपानऔररहन-सहनकेप्रतिजागरूकतालानीहोगी।भोज्यपदार्थमेंसमुचितमात्रामेंसभीविटामिनकीपूर्तिहो।शरीरकीप्रतिरोधकक्षमताबढ़ानेकेलिएदिनचर्याऔरखानपानमेंसजगताबरतनीचाहिए।जंकफूडअबभोजनकामुख्यआहारबनगयाहै।यहअनेकप्रकारकीबीमारियोंकाकारणबनरहाहै।भारतीयपरंपराकीजीवन²ष्टि,दिनचर्याऔरआहार-बिहारहोनाचाहिए।इसपरिवेशमेंपूरीदिनचर्यापरिवर्तितहोगईहै।इसकेलिएपूर्वजोंसेसीखलेनीहोगी।सूर्योदयकेपहलेजागनाऔरसमयसेसोनाचाहिए।नियमसेव्यायामकियाजाए।अलसीकेगुड़,भुजियाचावल,जौकीरोटी,फल,औषधिमेंजड़ी-बूटीयहसारेएकस्वस्थव्यक्तिकेलिएआवश्यकहैं।वर्तमानकीपीढ़ीइनसेदूरहोतीजारहीहै।बालिकाओंकोजागरूकहोनाहोगा।संचालनमिशनशक्तिप्रकोष्ठकीनोडलअधिकारीडा.नीतायादववसंचालनडा.रेनूत्रिपाठीनेकिया।