शारीरिक शिक्षा

चन्दौसी:संतनिरंकारीभवनपरसाप्ताहिकसत्संगकाआयोजनकियागया।छेदीलालनेकहाकिआजसंसारमेंप्रेमकीबहुतआवश्यकताहै,मानवताकेलिएजहांप्रेमहोताहै,वहांतकरारकाकोईकामनहींहोता।सभीकहतेहैकिप्रेमकरनाचाहिए,परन्तुलोभ,मोह,अहंकारआदिविकारप्रेमकेस्थानपरनफरतकारूपलेलेतेहैं।हमारेजीवनमेंप्रेमसमाप्तहोजाताहै।यदिलोभ,मोह,अहंकारकोत्यागदेंतोहमारेजीवनमेंप्रेमआजाएगा।परमात्मानेसंसारमेंसभीजीवोंकोवृद्धिदीहै,परन्तुविवेकसिर्फसिर्फमनुष्यकोदियाहै।इसविवेककोजागृतकरनेकाकार्यसिर्फसदगुरुकरतेहैं।निराकारकाज्ञानदेनेवालेजगतगुरुकीमहिमातोप्रभुसेभीबड़ीकहीगईहै।उन्होंनेकहाकिप्रभुतोसदासाथथा,परहमनहींजानतेथे।अबसदगुरुकेप्रतिकृतज्ञताज्ञापितकरनामुख्यकर्तव्यबनजाताहै,सोतेजागतेहरपलसदगुरुकाधन्यवादकरनेवालेकेजीवनकाआनंदतोउसभावमेंजीनेवालाहीजानपाताहै।इसअवसरपररतनलाल,रामप्रसाद,शान्तनु,नीरज,रामेश्वरी,आशु,सवितामौजूदरहे।

By Cox