शारीरिक शिक्षा

(अश्विनीश्रीवास्तव)नयीदिल्ली,15अक्टूबर(भाषा)लोकपालकीओरसेकहागयाहैकिउसकीपीठद्वारापारितकिसीआदेशपरपुनर्विचारकीयाचिकाओंकोस्वीकारनहींकियाजासकताक्योंकिइससेसंबंधितकानूनमेंपुनर्विचारकाप्रावधाननहींहैं।एकआधिकारिकआदेशमेंयहकहागयाहै।दरअसललोकपालकेपासउसकेआदेशोंपरपुनर्विचारयासमीक्षाकीमांगकरनेवालीकईशिकायतोंआरहीहैं,जिन्हेंदेखतेहुएलोकपालनेयहकहाहै।लोकपालकेतीनसदस्यों-न्यायमूर्तिअभिलाषाकुमारी,न्यायमूर्तिडीकेजैनऔरन्यायमूर्तिआईपीगौतमकीसमितिकागठनकियागयाथाजिसेपीठकेद्वारापारितआदेशोंपरपुनर्विचारकेअनुरोधोंसेसंबंधितनीतिकेबारेमेंविचारकरनेकीजिम्मेदारीदीगईथी।लोकपालकेअध्यक्षपिनाकीचंद्रघोषद्वारागठितसमितिनेछहअक्टूबरकोअपनीरिपोर्टसौंपी।सोमवारकोजारीआदेशमेंकहागया,‘‘समितिकीरायहैकिलोकपालएवंलोकायुक्तकानून,2013मेंपुनर्विचारकेव्यापकअधिकारनहींहोनेकेकारण,भारतकेलोकपालकीपीठद्वारापारितआदेशपरपुनर्विचारकेअनुरोधकोस्वीकारनहींकियाजासकता।’’समितिनेरिपोर्टमेंकहाकिकेंद्रसरकारसेअनुरोधकियाजासकताहैकिवहलोकपालएवंलोकायुक्तकानूनमेंपुनर्विचारकेअधिकारकोशामिलकरनेकेबारेमेंविचारकरे।