शारीरिक शिक्षा

बक्सर:नयाबाजारस्थितश्रीसीतारामविवाहमहोत्सवस्थलपरआयोजित52वांसिय-पियमिलनमहोत्सवकेमौकेपरदेशकेकोने-कोनेसेसाधु-संतोंएवंश्रद्धालुभक्तोंकाजमावड़ालगनाशुरूहोगयाहै।कोईहरियाणा,राजस्थान,दिल्ली,उत्तरप्रदेश,पश्चिमबंगालआदिसेतोकोईमथुरा,वृंदावन,अयोध्या,काशीआदिधार्मिकस्थलोंसेकार्यक्रममेंपहुंचअपनेकोधन्यमानरहेहैं।

प्रांतकेनालंदा,पटना,जहानाबाद,गया,मुज्जफरपुरआदिसेभीलोगपहुंचेहुएहैं।इसआनंदोत्सवकीबेलामेंसिमडेगा(रांची)सेतो40भक्तोंकाएकग्रुपहीपहुंचाहुआहै।दमोहकीकीर्तनमंडलीएकदिनपूर्वहीपहुंचगईहै।इसदौरानकिसीनेअपनेकोसाकेतवासीपरम्पूज्यनारायणदासजीभक्तमालीउपाख्यनेहनिधिमामाजीकाधर्मभाईतोकिसीनेउनकापरम्कृपापात्रशिष्यबतायाहै।टाटाकेसुरेंद्रकुमारझाकहतेहैंकिइसबक्सरधामकीमहिमाअपरिमेयहै,यहांआनेसेसालभरकीटानिकमिलजातीहै।दूसरीओर,जहांसंतमहानुभाओंकेरजसेमहर्षिविश्वामित्रकीयहधरतीपावनहोरहीहै।वहीं,सीतारामविवाहमहोत्सवस्थलपरबहरहीभक्तिरसकीधारासेपूरीविश्वामित्रनगरीरामकेलयमेंगोतेलगातेप्रतीतहोनेलगीहै।

व्यासगद्दीकीविधिवतपूजनऔरहुईआरती

श्रीसीतारामविवाहमहोत्सवआश्रमस्थलकेमहंतश्रीराजारामशरणदासजीमहाराजकेद्वाराबुधवारकोव्यासगद्दीवश्रीअवधधामसेपधारेकथाव्यासपूज्यश्रीमज्जगदगुरूरामानुजाचार्यस्वामी(डा.)श्रीराघवाचार्यजीमहाराजकीविधिवतपूजनएवंआरतीकीगई।वहीं,आश्रमकेसंस्थापकसहसंरक्षकसाकेतवासीपरमपूज्यनारायणदासजीभक्तमालीउपाख्यनेहनिधिमामाजीकोस्मरणकरतेहुएकहाकिउन्हींकीकृपासेविगत52सालसेयहआयोजनअनवरतजारीहै।मौकेपरप्रमुखकथाप्रवक्ताडा.राघवाचार्यजीनेअपनेमुखारबिदसेश्रीमद्बाल्मिकीयरामायणकथाकाश्रोताओंकोरसपानकराए।

मैयामोरीमैंनहींमाखनखायो..

सुबहमेंवृंदावनकीविख्यातस्वामीफतेहकृष्णकेनिर्देशनमेंआयोजितरासलीलाकार्यक्रममेंप्रभुझांकीदर्शनएवंगणेशवंदनाकेबादरासलीलामेंमाखनचोरलीलाकामंचनकियाजाताहै।जिसमेंदिखायाजाताहैकिभगवानश्यामसुंदरगोपियोंकेयहांमाखनचुरानेजातेहैं।जहांगोपियोंउन्हेंपकड़लेतीहैंऔरमांयशोदाकेपासलेकरआतीहैं।जबगोपियांमाखनचोरीकिएजानेकीशिकायतकरतीहैतोमांयशोदाश्रीकृष्णसेसवालकरतीहैकिक्यातूनेमाखनखाया?कृष्णबड़ेसहजभावसेउत्तरदेतेहैं-मैयामैंनहींमाखनखायो.।इसदृश्यकोदेखदर्शकभावुकहोजातेहैंऔरप्रभुवंदना,भक्तिसंगीतबीचजयकारेसेपूरापरिसरगूंजनेलगताहै।हिमाचलकेयहांमांपार्वतीकापुनर्जन्म

इधर,रात्रिमेंरामलीलाकार्यक्रमकेअन्तर्गतदिखायाजाताहैकिसतीजीकेपितादक्षद्वारायज्ञकाआयोजनकियाजाताहैऔरमहादेवकोनिमंत्रणनहींदियागयाहै।इसबातकीजानकारीहोनेपरसतीजीबिनाबुलाएवहांपहुंचजातीहैंऔरयज्ञसभामेंभोलेनाथकोनिमंत्रणनमिलनेकीबातकहतीहैं।दूसरीओर,सतीजीकेइसमोहकोदेखकरभगवानशंकरद्वाराउन्हेंत्यागदियाजाताहै।मंचनप्रसंगमेंदिखायाजाताहैकियज्ञकेआयोजनमेंपहुंचीसतीजीअपनेशरीरकोपितादक्षकेयज्ञमेंयोगद्वाराभस्मकरदेतीहैं।इसकेउपरांतहिमाचलकेयहांमांपार्वतीकेरूपमेंउनकापुनर्जन्महोताहैऔरउनकाविवाहशंकरजीकेसाथहोताहै।