शारीरिक शिक्षा

लखनऊ,जागरणसंवाददाता।पृथ्वीदिवसपरशुक्रवारकोबाबासाहबभीमरावअंबेडकरकेंद्रीयविश्वविद्यालयबीबीएयूकीओरसेगोदलिएगएगांवोंमेंचलेविधिकजागरूकताअभियानकेतहतउन्हेंभूगर्भजलदोहनअधिनियमकीजानकारीदीगई।विधिसंकायकेविभागाध्यक्षप्रो.एसकेचड्ढानेकहाकियदिभूगर्भजलकाअंधाधुंधदोहनकरतेहैंतोआपकोजेलहोसकतीहैयाफिरजेलसेकेसाथदोलाखसे20लाखतकजुर्मानालगसकताहै।

भूगर्भजलबचानेकेलिए2019मेंबनेउत्तररप्रदेशभूगर्भजल(प्रबंधनएवंविनियमन)अधिनियममेंइसकाप्रावधानकियागयाहै।विधिसंकायकेडा.अनीसअहमदकीओरसेअधिनियमकेबारेमेंविस्तारसेजानकारीदीगई।उन्होंनेबतायाकिविगतवर्षोंमेंभूगर्भजलकीसुरक्षा,संरक्षण,नियंत्रणतथाविनियमनकरनेकेलिएयहविधिबनायीगईहै,इसकाउद्देश्यग्रामीणएवंनगरीयक्षेत्रोंमेंभूगर्भजलकेअनियंत्रितऔरतीव्रगिरावटकोराेकनाहै।लोकहितमेंभूगर्भजलउपयोगकाप्रथमअधिकारपीनेकापानी,घरेलू,खेतीऔरपशुउपयोगमेंहोताहै।विनियममें10अध्यायऔर52धाराएंहैं।पहलाअध्यायप्रारंभिकशब्दोंकाउल्लेखहै।यहविनियमसंपूर्णप्रदेशमेंसातअगस्त2019सेलागूहोगयाहै।बावजूदइसकेजागरूकताकेअभावमेंदोहनजारीहै।

विनियमकीमुख्यविशेषताएं

पर्यावरणकेसाथबचाएंधरतीः अलीगंजकेकेंद्रीयविद्यायलकेशिक्षकसुशीलकुमारनेबतायाकिपृथ्वी'अथवा'पृथिवी'एकसंस्कृतशब्दहैंजिसकाअर्थ'एकविशालधरा'होताहै।वैसेपृथ्वीबहुतव्यापकशब्दहैजिसमेंजल,हरियाली,वन्यप्राणी,प्रदूषणऔरइससेजु़ड़ेअन्यकारकभीहैं।संसारमेंएकपृथ्वीहीहैजहांजीवनसंभवहै.पृथ्वीपररहनेवालेतमामजीव-जंतुओं,पेड़-पौधोंकोबचानेतथादुनियाभरमेंपर्यावरणकेप्रतिजागरुकताबढ़ानेकेलिएहरसाल22अप्रैलकोपृथ्वीदिवसमनायाजाताहै।वर्ष2022केलिएपृथ्वीदिवसकामुख्यविषयअर्थातथीम'इन्वेस्टइनअवरप्लानेटहै।

सचमैंदेखाजायतोहमाराभविष्यऔरआनेवालीपीढ़ीकाभविष्यआजकेबदलावपरनिर्भरहैपृथ्वीदिवसकेमनानेहेतु22अप्रैल1970कोअमेरिकाकेलगभगदोकरोड़लोग,जोउससमयअमेरिकाकीआबादीकेदसफीसदकेबराबरथे,पर्यावरणकीरक्षाकेलिएपहलीबारसड़कोंपरउतरेथे।अमेरिकीजनताकीइसपहलकोआधुनिकपर्यावरणआंदोलनकाप्रारंभमानाजाताहै।इसशुरुआतकेसमयकिसीनेसोचातकनहींथाकिपृथ्वीदिवसदुनियाकेसबसेबड़ेनागरिकआयोजनकारूपलेलेगा।

राष्ट्रपितामहात्मागांधीनेकहाथाकि“पृथ्वीपरहरइंसानकीजरूरतोंकोपूराकरनेकेलिएबहुतकुछहैलेकिनहरइंसानकीलालचकोपूराकरनेकेलिएनहीं”।वर्तमानमेंहमलोगपृथ्वीकीसंसाधनउत्पादनकरनेकीजितनीक्षमताहैउससेज्यादाउसकादोहनकररहेहैं।आलमयेहैकिआजहमपृथ्वीकेएकसालकेसंसाधनोंकीउपभोगलगभगसातमहीनोंमेंहीकरजारहेहैं।दुनियाअपनेप्राकृतिकसंसाधनोंकोअपनीऔकातसेअधिकख़र्चकररहीहै!लेकिनयहखर्चावहकोईकर्जलेकरनहींचलारहीहैं।

हमइसेपृथ्वीसेहीइसतरहसेवसूलरहेहैंजैसेअपनाघाटाकमकरनेकेलिएकोईदेशजनताकोइतनेकरोंसेलाददेकिउसकेपासठीकसेखानेतककेपैसेनबचें.यानीकिहरवर्षदुनियाकई-कईमहीनोंकेबराबरपृथ्वीकेप्राकृतिकसंसाधनोंकाअतिरिक्तदोहनकरतीहै!इसजबर्दस्तीकीउगाहीकीकीमतअंततःकभीनकभीऔरकिसीनकिसीरूपमेंहमेंदेनीहीहोगी।इससमयकीपृथ्वीसे60प्रतिशतबड़ीकोईदूसरीपृथ्वीमिलनीचाहिए।