शारीरिक शिक्षा

संवादसूत्र,जंदाहा:गुरु,माता,पिताएवंस्वामीकीभक्तिकामार्गजहांशिक्षासेप्राप्तहोतीहवहींएकविकसितदेशएवंविकसितराज्यकेसाथसाथविकसितसमाजकेलिएशिक्षितहोनाअतिआवश्यकहै।शिक्षाकेबगैरविकासकीकल्पनानहींकीजासकती।शिक्षामेंसुधारकेबिनादेशराज्यएवंसमाजकोविकसितकहनाबेईमानीहोगी।आजदेशमेंगरीबीइतनीबड़ीबाधानहींहैजितनीअशिक्षासेबाधाउत्पन्नहोरहीहै।प्राचीनशिक्षापद्धतिकीतरहबच्चोंकोशिक्षितबनाएजानेकीआवश्यकताहै।शिक्षाऐसीहोकिदेशकीमिट्टीसेजुड़ाहुआहो।उक्तबातेंस्थानीयमहिन्दवारागांवमेंरियलयूनिकस्कूलकेउद्घाटनकर्तापूर्वविधायकडॉक्टरअच्युतानंदनेअपनेसंबोधनमेंकही।आगेउन्होंनेकहाकिइसदेशकादुर्भाग्यहैकिदेशकेतत्कालीनकेंद्रीयशिक्षाराज्यमंत्रीकोशिक्षामेंसुधारकीमांगकोलेकरसड़कपरउतरनापड़े।पूर्वविधायकडॉ¨सहनेआगेकहाकिदेशएवंराज्यमेंबजटमेंऐसाप्रावधानहोकिहरघरमेंशिक्षारोजगारएवंखाद्यान्नसहजतापूर्वकप्राप्तहोसके।वहींउन्होंनेकहाकिआजदसप्रतिशतसवर्णोंकोदिएगएआरक्षणपरजोरदारचर्चाहोरहीहै।समारोहकीअध्यक्षताविद्यालयकेनिदेशकबृजेशश्रीवास्तवएवंसंचालनजितेंद्रकुमार¨सहनेकिया।समारोहकोमहनारप्रखंडप्रमुखसंगीताकुमारीरालोसपाकेजिलाउपाध्यक्षगंगारायडॉडी¨सहप्राचार्यप्रीतिरानीशिक्षिकारचनाकुमारीगुड़ियाकुमारीडॉक्टरओपीश्रीवास्तवसूरजभूषणप्रसादरंजीतझाआदिनेसंबोधितकिया।

By Craig