शारीरिक शिक्षा

बक्सर:धार्मिकनगरीबक्सरप88हजारऋषि-मुनियोंकीतपोस्थलीरहीहै।इसतपोस्थलीपरतीनदिनोंसेरामरसकीअमृतबूंदोंसेधरतीपावनहोरहीहै।बक्सरकीधरतीदेशकेकोने-कोनेसेपधारेसाधु-संतोंसेउर्वरहोरहीहै।यहांप्रतिदिनअनवरतचलरहेकरीब17घंटेकेइसआनंदोत्सवमेंश्रद्धालुगोतालगारहेहैं।

शहरकेनयाबाजारस्थितसीतारामविवाहमहोत्सवआश्रममेंश्रीसीतारामविवाहमहोत्सवकाआयोजनयहांप्रत्येकसालहोताहै।इसकारणहरकोईइसअमृतवर्षामेंभींगनेकीअभिलाषारखताहै।करीबसत्रहघंटेचलरहेकार्यक्रमकेदौरमेंदोपहरतीनबजेसेश्रीअवधधामसेपधारेस्वामी(डा.)श्रीराघवाचार्यमहाराजश्रीमद्वाल्मिकीयरामायणकथाप्रसंगकीअमृतवाणीकासोपानकराहीरहेहैं।इसदौरानश्रद्धालुविश्वप्रसिद्धवृंदावनकीश्रीकृष्णलीलावश्रीरामलीलाकाजीवंतमंचनकाभीलुत्फलेरहेहैं।महोत्सवण्मेंबच्चेसेलेकरवृद्धतकमहिला-पुरुषसभीशामिलहोरहेहैं।खेल-खिलौनेसेलेकरचाट-पकौड़े,नाश्ताआदिकेस्टालभीलगेहुएहैं।आश्रमकीओरसेमहाप्रसादग्रहणकरनेकीअलगसेव्यवस्थाभीकीगईहै।आश्रमकेएककारिदेनेबतायाकिफिलहालप्रतिदिनदोनोंसमयपांचसेछहहजारभक्तप्रसादग्रहणकररहेहैं।''पुष्पवाटिका''केदिनछहदिसंबरतथाआठदिसंबर''रामविवाह''केआयोजनमेंयहसंख्यादोगुनीसेभीअधिकरहनेकीसंभावनाहै।महोत्सवमेंदूर-दूरसेसंतोंकाआगमनजारीश्रीसीतारामविवाहमहोत्सवकेदीदारकोधीरेधीरेसंतोंकाआगमनजारीहै।दरभंगासेदिगंबरझा,बेंगलुरुसेअशोकजी,टाटानगरसेसुरेंद्रझा,वृंदावनसेरामदासजीएवंयदुशरणउर्फबाबूबाबागोवर्धनपहुंचचुकेहैं।वहीं,अयोध्यासेलक्ष्मणकिलाधीशश्रीमैथलीशरणजीमहाराजरविवारकोतथावृंदावनसेमलुकपीठाधीश्वरजगद्गुरुदेवाचार्यजीमहाराजशनिवारकोपधाररहे।आश्रमकेमहंतराजारामशरणजीमहाराजनेबतायाकिसंतोंकासमागमजारीहै।पुष्पवाटिकाकार्यक्रमतकश्रीशंकराचार्यसमेतअन्यकईविद्वतजनोंकेआगमनकीसंभावनाबनीहुईहै।इंसेट..,दिव्यदंपतीकीआरतीउतारूहेसखी..शुक्रवारकीसुबहगोपालभक्तलीलासेप्रभुश्रीकृष्णकेजीवनकालकेकृत्यकाअवलोकनअभिनयकेमाध्यमसेकरायाजाताहै।इसकीशुरुआत''दिव्यदंपतीकीआरतीउतारूहेसखी.केमंगलाचरणपदगायनद्वाराभगवानश्रीकृष्णकीसखियोंद्वाराआरतीसेकीजातीहै।जहांपरलीलाप्रसंगकेमाध्यमसेदिखायाजाताहैकिगोपालनामकाकिसानसंतोकेपाससत्संगसुननेजाताहै।फिर,किसानकेमनमेंविचारआताहैकिसत्संगकेबिनाजीवनअधूराहैऔरवहसंतोंकीसेवामेंउतरजाताहै।संतउन्हेंगौसेवाकाकार्यसौंपतेहैं।इसक्रममेंभगवानउन्हेंप्रत्यक्षरूपसेदर्शनदेतेहैं।भगवानकीइसझांकीकोदेखकरमौजूददर्शकभीमुक्तहोजातेहैं।इंसेट.भएप्रगटकृपालादीनदयालाकौशल्याहितकारी..

रात्तमेंरामलीलाकीभूमिकामेंव्यासआचार्यनेकहाकियोगलगनग्रहबारतिथिसकलभएअनुकूल,चरअरुअचरहर्षजुतरामजनमसुखमूल.,अर्थातजबभगवानकाजन्महुआतोयोगलग्नगृहवारऔरतिथिसभीअनुकूलहोगए,जड़औरचेतनसभीखुशीसेभरगए,क्योंकिभगवानश्रीरामकाजन्मसुखकाआधारहै।

इधर,रामजन्मकोदर्शकश्रद्धालुसभीमुदितथेकि''भएप्रगटकृपालादीनदयालाकौशल्याहितकारी.केपदगायनकेसाथलीलामंचनकादौरशुरूहोजातेहै।जिसमेंदिखायाजाताहैकिअयोध्यामेंमहाराजादशरथकेयहांश्रीरामअपनेअंशोंसहितअवतरितहोतेहैं।फिरगुरुवशिष्ठद्वाराचारोंभाइयोंकानामकरणसंस्कारहोताहै।इसक्रममेंव्यासपीठपरआसीनआचार्यकेमात्रिकछंदकोसुनकरश्रद्धालुखुशीसेझूमनेलगतेहैंऔरपूरालीलापरिसरजयश्रीराम,जयश्रीरामकेजयकारेसेगुंजायमानहोजाताहै।