शारीरिक शिक्षा

जागरणसंवाददाता,खूंटी:धर्मवहहैजिसमेंविचार,मन,आत्माऔरवाणीमेंकुशलताहो,जिससेकिसीकोकष्टनहो,व्यवहारमेंनम्रता,वाणीमेंमिठास,कर्ममेंसरलताऔरविचारमेंसात्विकताहो।मीठीवाणीकेसाथतनवमनसेस्वच्छमनुष्यहीपूरामनुष्यहै।येबातेंजैनमुनिविशाल्यसागरजीमहाराजनेकहीं।खूंटीस्थितजैनमंदिरमेंधर्मप्रवर्तकश्रमणमुनिश्री108विशल्यसागरजीमहाराजनेप्रवचनकेदौरानकहाकिजोमनुष्यधार्मिकप्रवृत्तिकेहैंऔरऔरजोधर्मसेजुड़ेहुएहैंउनकाधर्मकेप्रतिबहुतरुझानरहताहै।पूजा-अर्चनाहरमनुष्यकरनीचाहिए।उन्होंनेकहाकिसहीधर्मअपनेपरिवारसेमिलजुलकररहनाहै,अपनेमाता-पिताकाआदरकरना,छोटोंकोप्यारकरना,आस-पड़ोसमेंसभीसेमिलकररहना,सभीकेदुखतकलीफमेंसाथदेनाऔरकभीकिसीसेईष्र्यानाकरनाहीसहीधर्महै।महाराजनेकहाकिआपकितनीभीउन्नतिकरजाएं,कभीकिसीकोअपनेसेनीचानासमझना।यहजीवनएकबारमिलाहै,अपनेजीवनकोकिसमिसकीतरहबनाएंजोबाहरसेभीदिखनेमेंबहुतसरलहैऔरअंदरमेंभीखूबमिठासहै।अगरआपअपनेव्यक्तित्वकोइसतरहनिखारेंगेतोअवश्यआपकोमोक्षकीप्राप्तिहोगी।प्रवचनकाशुभारंभजैनसमाजखूंटीकेलोगोंद्वारास्वामीमहावीरस्वामीकेचित्रकेसमक्षदीपप्रज्वलितकरकियागया।साथहीनारियलसमर्पितकरकेप्रवचनकेलिएमुनिश्रीसेलोगोंनेआग्रहकिया।महाराजकेदर्शनऔरउनकाप्रवचनसुननेकेलिएरांचीऔरआसपाससेभीलोगपहुंचेथे।कार्यक्रमजैनसमाजकेअध्यक्षशिखरचंदजैनकीअध्यक्षतामेंहुई।

By Cooke