शारीरिक शिक्षा

वाराणसी[रविपांडेय]।कोरोनासंक्रमणकालमेंलोगोंकोसिर्फजीवनहीनजरनहींआयाबल्किमौतकेबादअंतिमसंस्कारकेलिएगांवकेहीशवदाहगृहनजरआनेलगेहैं।काशीकाऐतिहासिकमहाश्मशानहरिश्चंद्रघाटजहांमुक्तिकेलिएआसपासकेजिलेहीनहींबल्किबिहारतककेलोगअंतिमसंस्कारकेलिएआतेहैं।सत्यवादीऔरईमानदारराजाहरिश्चंद्रकेघाटपरकोरोनाकालकेमरनेवालेपरिवारीजनोंसेजिसतरहकीलूटमचीहैउससेलोगोंकामनविचलितहोजारहाहै।कोरोनासंक्रमणकेशवकेनामपरअंतिमसंस्कारके20से30हजारतकलगरहेहैं।ऐसेसमयमेंगांवोंमेंबनेशवदाहगृहलोगोंकेलिएकाफीराहतबनाहै।रोहनियाक्षेत्रकेबेटावर,मुदादेवऔरलंकाकेरमनागांवमेंबनेशवदाहगृहपरलाइनलगीहुईहै।इनघाटोंपरलोगअपनेसाधन,मैजिकयाएम्बुलेंसपरशवोंकेसाथलकड़ीलेकरपहुंचरहेहैंजहांमामूलीखर्चमेंहीअंतिमसंस्कारहोजारहाहै।

जहांकभीकभीजलतीथीचितावहांबुझनहीरहीहैचिताकीआग

बेटावरगांवकेरहनेवालेलोगोंकाकहनाहैकिइसघाटपरशायदहफ्तेमेंकोईशवजलानेआताथालेकिनलगातारजलरहीचिताओंनेदहशतकामाहौलबनादियाहै।गांवकेलोगोंनेकभीऐसीभयावहस्थितिनहींदेखीथी।पिछलेचारपांचदिनोंसेयहां20से30शवोंकोप्रतिदिनजलायाजारहाहै।वैसेयहघाटबनारसहीनहींपीपापुलकेकारणमिर्जापुरजिलेकोभीजोड़दियाहै।मुड़ादेवघाटपरभीप्रतिदिन10सेज्यादाशवोंकोजलायाजारहाहै।रमनागांवमेंबनेशवदाहगृहकारास्ताबस्तीसेहोनेकेकारणयहांबाहरीकमजारहेहैंलेकिनमहीनेमेंकभीचिताओंमेंआगलगनेवालीजगहपरचारसेपांचशवप्रतिदिनजलाएजारहेहैं।

राहतकेलिएहीमलहियामेंबनायागयाअस्थायीशवदाहस्थल

अंतिमसंस्कारकरनेआयेपरिवारवालोंकेसाथहोरहीलूटऔरकईघंटेतकइंतजारसेबचनेकेलिएहीप्रशासनकीतरफसेमलहियामेंगंगाकिनारेअस्थायीशवदाहस्थलबनायागयाहैजिसकाग्रामीणोंनेसंक्रमणकेडरसेविरोधभीकिया।मलहियामेंबनेअस्थायीशवदाहस्थलपरभीफोर्सऔरनगरनिगमकीउपस्थितिमेंप्रतिदिन20से25शवोंकाअंतिमसंस्कारकियाजारहाहै।

जिलेमेंमरनेवालोंकीसंख्यासैकड़ोंलेकिनआंकड़ेइकाईमें

कोरोनासंक्रमणकालमेंपहलीबारइतनेशवोंकाअंतिमसंस्कारदेखलोगोंमेंडरकामाहौलहै।हरशख्सकीजुबानपरएकहीसवालहैकिआखिरमरनेवालोंकीसंख्यासैकडोंमेंहैंतोफिरमौतकेआंकड़ेइकाईतकहीसीमितकैसेहैं।जिलेकेसबसेबड़ेमहाश्मशानमणिकर्णिकाघाटपरतोपूर्वांचलकेशवआनेसेसंक्याअक्सरज्यादारहतीहैलेकिनहरिश्चंद्रघाटपरआमदिनोंमें8से10शवआतेथेजोआज100केऊपरपहुंचगयाहै।यहांएम्बुलेंससेआनेवालेशवभी25सेकमनहींहैंजोपीपीईकिटमेंआरहेहैं।इसकेअलावाअन्यगांवोंमेंभीकोरोनाकेशवजलादिएजारहेहैंफिरभीमौतकाआंकड़ालोगोंकीसमझसेबाहरहै।