शारीरिक शिक्षा

संवादसूत्र,खरसावां:पारंपरिकइंद्रछतरीलगाकरदेवराजइंद्रकोप्रसन्नकरनेकेलिएश्रद्धालुनेउनकीआराधनाकरतेहुएधूमधामसेइंद्रोत्सवकाआयोजनकिया।मंगलवारकीशामखरसावांकेदित्यसाहीमेंइंद्रोत्सवमनायागया।राजपुरोहितअंबुजाख्यआचार्यनेभगवानइंद्रदेवकीविधिवतपूजाअर्चनाकी।पूजाकेदौरानबड़ीसंख्यामेंश्रद्धालुसमेतस्थानीयलोगपहुंचेथे।पूजाकेपश्चातपारंपरिकइंद्रछातालगायागयाऔरइंद्रभगवानसेसुखसमृद्धिकेसाथअच्छीबारिशकेलिएप्रार्थनाकी।

मौकेपरआशुतोषआचार्या,हरिशचंद्रआचार्या,जीतवाहनमंडल,राधेश्यामदे,भागरथीदे,गोपालदे,अनिलमंडल,सपनआचार्या,भुतांगमंडल,गोव‌र्द्धनराउतसमेतकाफीसंख्यामेंलोगउपस्थितथे।

राज्यसरकारवहनकरतीहैपूजाकाखर्च

पूजाकाआयोजनअच्छीफसलवसुखसमृद्धिकीकामनालिएकियाजाताहै।दितसाहीमेंइंद्रोत्सवकाआयोजनराजाराजवाड़ेकेसमयसेहोताआरहाहै।पूजामेंहोनेवालाखर्चराज्यसरकारवहनकरतीहै।उक्तपूजाकेलिएइसवर्षखरसावांअंचलकार्यालयसेराशिखर्चकीगईहै।बुधवारकोयहांमेलाकाआयोजनकियाजाएगा।देवराजइंद्रकीपूजाउसीसादगीकेसाथहोतीहै,जैसाकिराजाराजवाड़ेकेजमानेमेंहोतीथी।पूर्वमेंइसपूजाकाआयोजनराजपरिवारकीओरसेकियाजाताथा।अबसरकारीखर्चसेपूजाकाआयोजनहोताहै।कहाजाताहैकि1667मेंठाकुरपद्मनाभद्वाराखरसावांरियासतकीस्थापनाकरनेकेकुछवर्षबादहीयहांदेवराजइंद्रकीआराधनाकापर्वइंद्रोत्सवकाआयोजनशुरूकियाथा।खरसावांरियासतकी13पीढि़योंसेशासकोंनेयहांभगवानइंद्रकीपूजा-अर्चनाकोजारीरखा।1947मेंदेशआजादहोनेकेबादजबखरसावांरियासतकाविलयभारतगणराज्यमेंहुआ,तोतत्कालीनराजाश्रीरामचंद्रसिंहदेवनेबिहारसरकारकेसाथमर्जरएग्रीमेंटकरदितसाहीमेंहरवर्षहोनेवालेइंद्रोत्सवकेआयोजनकीजिम्मेवारीराज्यसरकारकोसौंपदीथी।तभीसेसरकारीस्तरपरइंद्रोत्सवकाआयोजनहोतेआरहाहै।पूर्वमेंसरकारकीओरसेपूजाकेलिएकाफीकमराशिदीजातीथी।झारखंडबननेकेबादइसराशिमेंबढ़ोतरीकीगईहै।

इंद्रोत्सवदेवराजइंद्रकीआराधनाकात्योहार

मान्यताहैकिइंद्रोत्सवकेआयोजनसेभगवानइंद्रप्रसन्नहोतेहैं।क्षेत्रमेंअच्छीफसलहोनेकेसाथ-साथसुख-समृद्धिआतीहै।खरसावांकेदितसाहीमेंइंद्रोत्सवकाआयोजननिर्बाधरूपसेहोतेआरहाहै।